К масштабным пожарам, уже больше месяца пылающим в тропических лесах бассейна Амазонки, приковано внимание всего мира.
Пользователи соцсетей и многие мировые СМИ утверждают: в этом году число пожаров и их общая площадь совершенно беспрецедентны, что ставит под угрозу сами "зеленые легкие планеты" - огромный лесной массив, производящий существенную часть кислорода, которым мы дышим.
И хотя есть масса причин переживать по поводу горящих лесов Амазонии - в основном из-за их невероятного биоразнообразия, - амазонские джунгли вряд ли можно назвать "легкими планеты", а бушующие там пожары уж точно никак не угрожают атмосферному кислороду, от которого зависит все живое.
Масштаб пожаров в амазонских лесах в этом году действительно выше обычного. По данным спутников НАСА, по всей видимости, они начались в Парагвае, а к 19 августа распространились на территорию Боливии и Бразилии.
При этом в Бразилии число и интенсивность возгораний существенно выше, чем в прошлом году и в целом за последние девять лет - с 2010 года, - что хорошо видно на картинке ниже.
В четверг на прошлой неделе, накануне саммита "Большой семерки" в Биаррице, французский президент Эммануэль Макрон призвал мировых лидеров обсудить "чрезвычайную ситуацию" с пожарами в Амазонии.
"Наш дом горит. Буквально. Дождевые леса Амазонии - легкие, которые производят 20% кислорода на нашей планете - охвачены огнем. Это международный кризис. Участники саммита G7, давайте через два дня первым делом обсудим эту чрезвычайную ситуацию!" - написал Макрон, продублировав твит на английском языке.
За неполную неделю эти два сообщения Макрона собрали в общей сложности 75 тысяч ретвитов и больше 200 тысяч лайков.
Оставим за скобками не вполне корректную, но весьма распространенную метафору (легкие не производят кислород - они его, напротив, как раз потребляют) и внимательно посмотрим на саму цифру 20%, которую можно встретить в разных источниках.
Например, в тот же день похожий твит написал американский астронавт Скотт Келли: "Я заметил разницу в Амазонии между своим первым полетом в 1999 г. и последним, в 2016". Меньше леса, больше горящих полей. Дождевые леса Амазонии производят более 20% мирового кислорода. Нам нужен кислород, чтобы выжить!"
Thursday, August 29, 2019
Wednesday, August 21, 2019
भारत- पाक नियंत्रण रेखा पर फंसे कश्मीरी वापसी के इंतज़ार में - ग्राउंड रिपोर्ट
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद से नियंत्रण रेखा पर हालात खराब होते जा रहे हैं.
दोनों देशों की सेनाएं नियंत्रण रेखा पर एक दूसरे के सैनिकों को मारने के दावे कर चुकी हैं. एक-दूसरे के आम नागरिकों को निशाना बनाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं.
तनाव बढ़ने के बाद से पाकिस्तान की सरकार पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में कम से कम पांच लोगों के मारे जाने की पुष्टि कर चुकी है.
साथ ही दोनों देशों के बीच यातायात सेवाएं भी निलंबित कर दी गई हैं. ऐसे हालात में बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो सरहद के आरपार फंस कर रह गए हैं.
इस समय हालात ऐसे हैं कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से संबंध रखने वाले कम से कम चालीस लोग नियंत्रण रेखा के पार वापसी के इंतज़ार में हैं जबकि भारत प्रशासित कश्मीर से संबंध रखने वाले दस लोग वापस जाने के लिए तरस रहे हैं.
19 अगस्त को नियंत्रण रेखा पर तीतरीनोट क्रासिंग प्वाइंट खुलने की ख़बरें आईं तो वहां मुसाफ़िर भी मौजूद थे और उन्हें लेने आए उनके रिश्तेदार भी लेकिन क्या मुसाफ़िर और क्या उन्हें लेने आने वाले, सभी मायूस ही लौटे.
क्रासिंग प्वाइंट पर अपने रिश्तेदारों को लेने आए लोग मीडिया से बचते हुए नज़र आए.
एक परिवार के मुखिया से जब हमने बात की तो उन्होंने कहा कि वो इंतज़ार तो कर रहे हैं लेकिन इस बारे में मीडिया से बात नहीं कर सकते क्योंकि ऐसा करने से नियंत्रण रेखा के दूसरी ओर मौजूद रिश्तेदारों को मुश्किल हो सकती है.
भारत प्रशासित कश्मीर से वापसी का इंतज़ार कर रहे लोगों में पलंदरी के इलाक़े के रहने वाले इरफ़ान रशीद के चाचा और उनके रिश्तेदार भी सामिल हैं. इरफ़ान रशीद ने बताया कि उनके चाचा और परिजनों को चार अगस्त को वापस आना था लेकिन हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि रास्ता ही नहीं खोला गया.
"आज पता चला कि दोनों तरफ़ फंसे यात्रियों के लिए ख़ास तौर पर रास्ता खोला जाएगा, इसलिए सुबह से यहां इंतज़ार कर रहे थे. कई घंटों बाद पता चला है कि आज भी रास्ता नहीं खोला जाएगा. अब अगले सोमवार को बुलाया है."
वो कहते हैं, "जो इस बार हो रहा है ऐसा इससे पहले कभी नहीं हुआ, पहली बार हालात इतने ख़राब हुए कि समझ नहीं आ रहा कि वो वापस आ सकेंगे या नहीं, कोई संपर्क भी नहीं हो पा रहा है."
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में क्रासिंग प्वाइंट्स का प्रबंध देखने वाली अथॉरिटी टाटा के मुताबिक उनकी कोशिश के बाद सरकार और संबंधित संस्थान इस बात पर राज़ी हुए हैं कि जो वापस आने और जाने वाले यात्री हैं उनकी वापसी का प्रबंध किया जाए जबकि नए यात्रियों के आने-जाने पर पाबंदी जारी रहेगी.
पाकिस्तान की ओर से अधिकारियों ने जब हामी भरी तो उस वक़्त तक इतनी देर हो चुकी थी कि नियंत्रण रेखा के दूसरी ओर से बताया गया कि लौटने का इंतज़ार कर रहे लोग वापस चले गए हैं और अब वो अगले सप्ताह ही आएंगे.
दोनों देशों की सेनाएं नियंत्रण रेखा पर एक दूसरे के सैनिकों को मारने के दावे कर चुकी हैं. एक-दूसरे के आम नागरिकों को निशाना बनाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं.
तनाव बढ़ने के बाद से पाकिस्तान की सरकार पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में कम से कम पांच लोगों के मारे जाने की पुष्टि कर चुकी है.
साथ ही दोनों देशों के बीच यातायात सेवाएं भी निलंबित कर दी गई हैं. ऐसे हालात में बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो सरहद के आरपार फंस कर रह गए हैं.
इस समय हालात ऐसे हैं कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से संबंध रखने वाले कम से कम चालीस लोग नियंत्रण रेखा के पार वापसी के इंतज़ार में हैं जबकि भारत प्रशासित कश्मीर से संबंध रखने वाले दस लोग वापस जाने के लिए तरस रहे हैं.
19 अगस्त को नियंत्रण रेखा पर तीतरीनोट क्रासिंग प्वाइंट खुलने की ख़बरें आईं तो वहां मुसाफ़िर भी मौजूद थे और उन्हें लेने आए उनके रिश्तेदार भी लेकिन क्या मुसाफ़िर और क्या उन्हें लेने आने वाले, सभी मायूस ही लौटे.
क्रासिंग प्वाइंट पर अपने रिश्तेदारों को लेने आए लोग मीडिया से बचते हुए नज़र आए.
एक परिवार के मुखिया से जब हमने बात की तो उन्होंने कहा कि वो इंतज़ार तो कर रहे हैं लेकिन इस बारे में मीडिया से बात नहीं कर सकते क्योंकि ऐसा करने से नियंत्रण रेखा के दूसरी ओर मौजूद रिश्तेदारों को मुश्किल हो सकती है.
भारत प्रशासित कश्मीर से वापसी का इंतज़ार कर रहे लोगों में पलंदरी के इलाक़े के रहने वाले इरफ़ान रशीद के चाचा और उनके रिश्तेदार भी सामिल हैं. इरफ़ान रशीद ने बताया कि उनके चाचा और परिजनों को चार अगस्त को वापस आना था लेकिन हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि रास्ता ही नहीं खोला गया.
"आज पता चला कि दोनों तरफ़ फंसे यात्रियों के लिए ख़ास तौर पर रास्ता खोला जाएगा, इसलिए सुबह से यहां इंतज़ार कर रहे थे. कई घंटों बाद पता चला है कि आज भी रास्ता नहीं खोला जाएगा. अब अगले सोमवार को बुलाया है."
वो कहते हैं, "जो इस बार हो रहा है ऐसा इससे पहले कभी नहीं हुआ, पहली बार हालात इतने ख़राब हुए कि समझ नहीं आ रहा कि वो वापस आ सकेंगे या नहीं, कोई संपर्क भी नहीं हो पा रहा है."
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में क्रासिंग प्वाइंट्स का प्रबंध देखने वाली अथॉरिटी टाटा के मुताबिक उनकी कोशिश के बाद सरकार और संबंधित संस्थान इस बात पर राज़ी हुए हैं कि जो वापस आने और जाने वाले यात्री हैं उनकी वापसी का प्रबंध किया जाए जबकि नए यात्रियों के आने-जाने पर पाबंदी जारी रहेगी.
पाकिस्तान की ओर से अधिकारियों ने जब हामी भरी तो उस वक़्त तक इतनी देर हो चुकी थी कि नियंत्रण रेखा के दूसरी ओर से बताया गया कि लौटने का इंतज़ार कर रहे लोग वापस चले गए हैं और अब वो अगले सप्ताह ही आएंगे.
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